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क्या पटाखों पर बैन उचित है?

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           आज बहुत दिनों बाद ब्लॉग लिख रहा हूं। विषय एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली और उसके आसपास 1 नवंबर तक पटाखे बैन कर दिये हैं। क्या ये  निर्णय उचित है ? पर्यावरण की दृष्टि से यह निर्णय उचित लगता है लेकिन अगर इस निर्णय का गहन अवलोकन किया जाए  तो न्याय के मंदिर से निकला हुआ ये अन्यायपुर्ण कदम है । दिल्ली वह आस-पास के हिंदू परिवारों को यह निर्णय सीधे ही दिवाली जैसे शुभ त्योहार  को पारंपारिक विधि से मनाने से वंचित करता है। पटाखों के बिना कैसी दिवाली ?         आज से कुछ वर्ष पूर्व जैसे भी दशहरा आता था वैसे ही पटाखों की धूम धड़ाम सुनाई देने लगती थी ।  गली गली बच्चे छोटे मोटे पटाखे चलाते रहते थे । बदलते समय के साथ  आजकल के बच्चों का ध्यान स्मार्ट फोन और इंटरनेट की तरफ हो जाने की वजह से यह धूम धड़ाम पहले ही कम हो गई है । पटाखों की बढ़ती कीमत के कारण पटाखों का फोड़ना अब केवल दिवाली तक ही सीमित रह गया है।  ऐसे में दिवाली के दिन पटाखे फोड़ने से रोकना हिंदू ए...