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भारतीय न्याय व्यवस्था - आशा की नई किरण

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तमाम विरोधाभासों के बावजूद भारतीय न्यायालयों द्वारा हाल ही में किए गए निर्णय एक आशा की किरण जगाते हैं।  सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक पर प्रतिबंध  लगाकर मुस्लिम समाज में फैली कुप्रथा के ऊपर अंकुश लगा कर मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाया है।  और उन्हें अन्य  भारतीय महिलाओं के समकक्ष अपने समाज में इज्जत के साथ जीने का अवसर प्रदान किया है।ये मुस्लिम महिलाओं के लम्बे सघंर्ष का एक सुखद परिणाम है।             तीन तलाक के फैसले के अगले ही दिन एक और फैसला आया। ये फैसला आम नागरिक के लिए निजता का अधिकार ( Right of Privacy) लेकर आया। ये फैसला सीधे ही सरकार के 'आधार' कार्यक्रम पर चोट करता है। इसके अनुसार आधार के लिए किसी भी व्यक्ति को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (Finger print verification) के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अब आधार के लिए सरकार किस तरह से सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृति ले पाएगा।          इन दोनों फैसलों  पर बुद्धिजीवी ...